धारा 370 समाप्त करके सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया – डा. संदीप कटारिया

क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बतया कि भारतीय राष्ट्र राज्य के लिए इतना बड़ा फैसला पिछले कई दशकों में नहीं हुआ है। सरकार ने बड़ा जोखिम उठाया है।  जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 के खंड  एक को छोड़कर बाकी सभी खंड़ों को खत्म करना भारत सरकार का ऐतिहासिक कदम है। करीब 70 साले से अनुच्छेद 370 के नासूर देश को चुभ रहे थे। इस अनुच्छेद के चलते जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा होते हुए भी देश के बाकी हिस्सों के लोगों के लिए बेगाना था। जम्मू- कश्मीर के 26 अक्टूबर 1947 को भारत में विलय के बाद 17 अक्टूबर 1947 को अनुच्छेद -370 के भारतीय संविधान के अंग बनने से लेकर अब यह धारा हौवा बनी हुई थी। अनुच्छेद-370 भारतीय संविधान में बाधा बना हुई थी और एक राष्ट्र, एक संविधान, एक नागरिक व एक झंडा की राह में बाधा बनी हुई थी। ग्रहमंत्री अमित शाह के अनुच्छेद-370 के अधिकांश खंड़ों को समाप्त करने के लिए राज्यसभा में संकल्प पेश करने और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अनुच्छेद 370 हटाने का आदेश जारी किया। सदन में राष्ट्रपति के आदेश की जानकारी देने के बाद शाह ने कश्मीर की स्थिति में बड़े बदलाव लाने वाले दो प्रस्ताव और दो बिल राज्यसभा में पेश किए, जिन्हें दिनभर चर्चा के बाद मंजूरी मिल गई। साथ ही अनुच्छेद -35ए का अस्तित्व भी समाप्त हो गया। अब राज्य से बाहर का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में संपŸिा खरीद सकेगा, वहां उद्योग लगा सकेगा, कारोबार कर सकेगा। राज्य का अलग झंडा नहीं होगा, दोहरी नागरिकता नहीं होगी, देश के सभी कानून बाकी राज्यों की तरह यहां भी लागू होंगे। विधानसभा का कार्यकाल 6 नहीं 5 साल होगा। अब जम्मू कश्मीर पूर्ण राज्य नहीं बल्कि केंद्रशासित प्रदेश होगा, पर दिल्ली की तरह वहां विधानसभा होगी। लद्दाख पूर्णतया अलग केंद्र शासित क्षेत्र होगा। वहां चंडीगढ़, अंडमान निकोबार की तरह विधानसभा नहीं होगी। लद्दाख के लोगों की लंबे समय से यह मांग थी। अब तक धारा 370 व 35ए की आड़ में कश्मीर के राजनीतिक दल नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी समेत अन्य छोटे दल व कांग्रेस-सीपीआई केंद्र सरकार के साथ ब्लैकमेल की सियासत करते रहे हैं। वहां अलगाववाद को खाद-पानी देते रह कर पीडीपी जैसे दल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते रहे। राज्य के विशेष दर्जे को ढाल बनाकर पचास के दशक से कुछ परिवार अपनी राजनीति चमकाते रहे। इस विशेष दर्जे के चलते ही राज्य में अलगाववादियों को फौज पनपी। धारा-370 व कश्मीर मसले को संयुक्त राष्ट्र ले जाकर  पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गलतियां की थी। उसका खामियाजा देश 70 साल से भुगत रहा है। कश्मीर पाक प्रायोजित आतंकवाद से छलनी होता रहा। लंबे समय से जम्मू-कश्मीर से धारा-370 व 35ए हटाने की मांग की जा रही थी। अब जाकर वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेकर जम्मू-कश्मीर को दोनों धाराओं के बोझ से मुक्त किया है। जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे के खत्म होने व सीधे कंेद्र के अधीन आ जाने से अब पाकिस्तान अलग कश्मीर मुद्दे पर कुछ भी बोलेगा तो वह भारत के अंदरूनी मामलों में दखल माना जाएगा। मोदी सरकार ने धारा-370 पर साहसिक फैसला लेकर जहां अपना चुनावी वादा पूरा किया है, वहीं देश के इतिहास में स्वर्णिम पल जोड़ दिया है। डा. संदीप कटारिया ने बताया कि मोदी सरकार ने एक भीषमासुर व कश्मीर पर कलंक को खत्म करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *