क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बताया कि तीन तलाक बिल 2019 पर संसद के दोनों सदनों की मुहर लग चुकी है। अब राष्ट्रपति की मुहर लगते ही यह कानून प्रभावी हो जाएगा। इसके बाद एक समय मंे अपनी पत्नी को तलाक-तलाक-तलाक कहना अपराध होगा और आरोपी को तीन साल तक कैद और जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। डा. कटारिया ने कहा कि इस कानून से क्या वाकई मुसलमान महिलाओं को राहत मिलेगी या पति का जेल जाना उनके लिए ही मुश्किलों का सबब बनेगा?
डा. कटारिया ने बताया कि मुस्लिम महिलाएं बहुत वक्त से इंतजार कर रही थी। इस तीन तलाक की वजह से मुसलमान औरतों को न जाने क्या-क्या बर्दाश्त करना पड़ता था, मिनटों मंे घर से बाहर निकलना पड़ता था। सरकार के द्वारा उठाया गया यह एक ऐतिहासिक कदम है, जो मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाली नाइंसाफी को रोकेगा। अब मुसलमान भाई अपनी बीवियों को तलाक देने से पहले दो बार-चार बार रूककर सोचेंगे कि ऐसा करने से उन्हें सजा हो सकती है। महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में भी ये एक बड़ा कदम है। सरकार का मकसद निर्दोष पतियों को सजा दिलवाना है बल्कि मेरा मानना है कि सजा के डर से पुरूष तीन तलाक देने के बारे में सोचेंगे भी नहीं। यह ध्यान देने वाली बात है कि तीन महीने के भीतर दिए जाने वाले तलाक पर पाबंदी नहीं लगाई गई है बल्कि एक बार में तीन तलाक देने को गैरकानूनी घोषित किया गया है।
सच्चाई तो ये है कि बहुत सी मुसलमान महिलाओं ने इसके लिए बाकायदा ‘हस्ताक्षर अभियान’ चलाया था कि कानून पारित करके ट्रिपल तलाक को गैरकानूनी करार दिया जाए। डा. संदीप कटारिया ने बताया कि तीन तलाक कानून किसी धर्म विशेष को निशाना बनाता है। मेरा मानना है कि कानून सभी औरतों के लिए समान होना चाहिए, चाहे वो किसी भी धर्म या समुदाय से ताल्लुक रखने वाली हांे।
डा. कटारिया ने बताया कि पहले तीन तलाक बोलकर उन्हें रातों-रात घर से बेदखल कर दिया, ना उन्हें किसी तरह की आर्थिक मदद मिलती थी और न ही कानूनी इसलिए मुझे लगता है कि तीन तलाक कानून महिलाओं के हक में है, न कि उनके खिलाफ।

