क्राईम रिफार्मर एसोसियेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बताया कि डॉलर की तुलना में रूपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। भारतीय शेयर बाजार रूपये में 26 पैसे की गिरावट के साथ खुला और एक डॉलर की कीमत 71 रूपए हो गई। डा. कटारिया ने बताया कि भारतीय मुद्रा रूपए की 2018 में उभरते बाजार की मुद्राओं सबसे बुरी हालत दिख रही है। यहां तक की एशिया-प्रशांत में भी इसकी हालत पतली हो गई है।
आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि रूपए का कमजोर होना भारत के व्यापारिक घाटे का भी परिचायक है कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में रूपए पर दबाव बना रहेगा। भारतीय कंपनियों के बढ़ते विदेशी खर्चों को भी रूपए में गिरावट का एक कारण माना जा रहा है।
अमरीका में ब्याज दरों में बढ़ोतरी से लगभग सभी बड़े बाजार पूंजी निकाले जाने की चुनौती से जूझ रहे हैं। जिन देशों का चालू खाता घाटा ज्यादा है वो सबसे ज्यादा बेहाल हैं। डा. कटारिया ने कहा कि दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण हैं जो चालू खाते में घाटा के कारण अपनी मुद्रा में गिरावट से जझ रहे हैं। चालू खाता घाटा व्यापार संतुलन पर निर्भर करता है। व्यापार संतुलन का मतलब किसी भी देश के आयात और निर्यात में संतुलन से मतलब है। तेल की कीमतों में किसी भी तरह की कोई गिरावट की उम्मीद नहीं है। ऐसे में रूपए की स्थिति में तत्काल कोई सुधार की उम्मीद नहीं है। तेल की कीमतों के बारे में कहा जा रहा है कि यह 70 डॉलर प्रति बेरल के आसपास रहेगी। भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी का 2.5 फीसदी हो गया है जो कि पिछले 6 सालों में सबसे ज्यादा है।
डा. कटारिया ने बताया कि अगर कच्चे तेल की कीमत 90 डॉलर प्रति बेरल पहुंच जाता है तो भारत का चालू खाता घाटा जीडीपीका 3.6 फीसदी हो जाएगा। हालांकि भारत विदेशी मुद्रा भंडार के मामले में ज्यादा स्थिर हुआ है। इंस्टिटयूट फोर इंटरनेशनल फाइनेंस के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इतना है कि 10 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है जबकि 2013 में छह महीनों के आयात भर ही बचा था। इसके साथ ही जीडीपी के आकार और बड़ेे उभरते बाजारों के अनुपात में भारत पर विदेशी कर्ज कम है।
भारत के आयात बिल में बढ़ोतरी नहीं थमी तो यह सिलसिला और जारी रह सकता हैं। डॉलर की तुलना में रूपया 70.855 तक चला गया था और आज 71 तक पहुंच गया । यह अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर है।
डा. कटारिया ने बताया कि इस साल की शुरूआत से ही रूपए में गिरावट जारी है और अब तक 10 फीसदी गिरावट आ चुकी है। कई विश्लेषकों का कहना है कि रूपया एक डॉलर की तुलना में 72 का आंकड़ा छू सकता है। हालांकि यह मसला केवल भारत का ही नहीं है। दुनिया भर के बड़े बाजार में वहां की मुद्रा की हालत पतली है। तुर्की की मुद्रा लीरा ऐतिहासिक गिरावट झेल चुकी है। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में से एक है। अगर तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत के आयात बिल पर सीधा असर पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार से भी प्रभावित होता है। ईरान पर अमरीकी प्रतिबंधों के कारण भारत तेल आयात करना बंद कररहा है। ईरान भारत को तेल डॉलर के बजाय रूपए लेकर भी देने की सुविधा देता था। ईरान से भारत का तेल आयात नहीं करना भी किसाी झटके से कम नहीं है।

