नजरिया सही हो तो मानव हितकर है हमारे लिए – डा. संदीप कटारिया

क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बताया कि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में तनाव भी मनुष्य की जिंदगी का एक हिस्सा बनकर रह गया है, जो अत्यंत घातक है। तनाव वास्तव मंे क्या है? सामान्य बोलचाल में तनाव का अर्थ है खिंचाव। इस खिंचाव का कारण होता है हमारे शरीर में तनाव पैदा करने वाले हार्मोंस का बढ़ जाना। इसके लिए उŸारदायी है हमारी सोच क्योंकि हमारी सोच से ही हमारी कार्यशैली अथवा जीवनशैली निर्धारित करती है। विभिन्न दुश्चिंताओं के कारण जब हमारे शरीर में स्ट्रेस हार्मोंस बढ़ जाते हैं तो शरीर में विभिन्न मांसपेशियों में सामान्य से अधिक खिंचाव उत्पन्न हो जाता है जिससे शरीर के कई तंत्र ठीक से कार्य नहीं कर पाते। ऐसे में कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती है। यदि इन समस्याओं का समय पर उपचार नहीं किया जाता है तो ये गंभीर बीमारियों में परिवर्तित हो सकती हैं।

तनावजन्य स्थितियों से हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति का हृास होते लगता है जिससे हम और भी कई बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं और इस कारण बीमार होने पर स्वाभाविक रूप से शीघ्र रोगमुक्त नहीं हो पाते। लगातार रहने वाला तनाव अवसाद में भी बदल सकता है। इसलिए तनाव को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। जहां तक तनाव से पूर्ण मुक्ति की बात है तो यह न तो संभव है और न ही इसे जरूरी समझा गया है। सच तो यह है कि थोड़ा-बहुत तनाव रहना हमारे हित में ही है। गड़बड़ तब होती है जब यह एक सीमा से अधिक हो जाता है और चाह कर भी हम इससे निकल नहीं पाते। उस स्थिति में यह घातक हो जाता है।

यहां प्रश्न उठता है कि थोड़ा बहुत तनाव अगर हमारे हित में है तो कैसे? उसके क्या लाभ हैं और यह किस सीमा तक उचित या लाभदायक है? आइए, अपने घरों का ही एक उदाहरण लें। घरों में कपड़े सुखाने के लिए हम कुछ रस्सियां बांध लेते हैं। यह वह रस्सी ढीली बंधी होती है तो कपड़े डालते ही रस्सी लटक जाती है और सारे कपड़े बीच में एक जगह आकर इकट्ठा हो जाते हैं। इसके उलट अगर रस्सी को बहुत खींचकर बांधा जाता है तो ज्यादा तनाव या खिंचाव के कारण वह बहुत जल्दी टूट जाएगी। इसीलिए रस्सी को न तो बहुत ज्यादा खींचकर बांधा जाता है और न बहुत ढीला ही रखा जाता है।

तनाव को लेकर भी हमारी स्थिति बिल्कुल ऐसी ही होती है। यदि जीवन में बिल्कुल तनाव नहीं है तो हम निठल्ले और कमजोर हो जाएंगे। इसके विपरीत अगर तनाव बहुत अधिक है तो वह हमें बीमार बना देगा। हां संतुलित स्थिति में रहे तो तनाव भी रस्सी की तरह हमारे लिए उपयोगी साबित होगा। तनाव के कारण ही हम किसी कार्य को समय पर पूरा करने के लिए जी-जान से जुट जाते हैं।

वस्तुतः हमारी हर प्रकार की सफलता व व्यक्तित्व के विकास में तनाव भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है। हमें चाहिए कि हम तनाव के स्वरूप को समझें और उसे लेकर अतिरिक्त तनाव उत्पन्न न होने दें। यह कुछ वैसा ही है जैसा बाकी समस्याएं। सकारात्मक नजरिया हमें समस्याओं को अवसर के रूप में लेना सिखाता है। हम समस्याओं से सीखते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। ऐसे ही तनाव को भी हम खुद पर हावी न होने दे ंतो उससे फायदा लेते हुए आगे बढ़ सकते हैं।

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