जल संरक्षण को लोगों के लिए जनांदोलन बनाना होगा – डा. संदीप कटारिया

क्राइम रिफॉर्मर एसोसिएशन के राष्ट्रीय  अध्यक्ष डा. संदीप कटारिया ने बताया कि प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली व 54वीं ‘मन की बात’ में जलसंरक्षण को स्वच्छता अभियान की तरह आंदोलन बनाने की जरूरत को रेखांकित किया है। उन्होंने कहा कि जल संकट का समाधान सरकार के प्रयास और जनाभागीदारी से ही संभव है।
गत माह नीति आयोग ने देश में जलसंकट पर अपनी समग्र जल प्रबन्धन सूचकांक रिपोर्ट पेश की थी। जिसमें कहा गया है कि भारत में करीब 60 करोड़ लोग पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। भारत में तकरीबन 70 फीसदी जल प्रदूशित है। जल प्रबन्धन सूचकांक में भारत 122 देशों  में 120वें पायदान पर है। झारखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश  और बिहार जल प्रबन्धन के मामले में सबसे खराब राज्य है। महाराश्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, राजस्थान व हिमाचल प्रदेश गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग का नाम लिए बगैर नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट में जल संरक्षण प्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है, क्योंकि जल संकट को लेकर जिस तरह की भयावह तस्वीर सामने आई है, केन्द्रीय जल आयोग ने उस तरफ कभी गंभीरता से अपनी रिपोर्ट या आंकड़े के जरिए देश के नीति नियताओं का ध्यान आकृश्ट नहीं कराया। इसी का परिणाम है कि आज देश सबसे गंभीर संकट से जूझ रहा है और लाखों जिंदगियों का अस्तित्व खतरे में है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक 2030 तक देश में पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी, जिसका मतलब है कि करोड़ों लोगों के लिए पानी का संकट पैदा हो जाएगा। दरअसल कहा जाता है कि देश में जल की कमी नहीं है, बल्कि पानी के नियोजन की कमी है। भारत प्राचीनकाल से जल सम्पन्न रहा है और वैदिक काल से कही जल सरंक्षण को महत्व दिया है। देश में नदियों का जाल है। हम तीन तरफ से महासागर से घिरे हुए हैं। तालाबों व कुओं के जरिए जल संरक्षण की हमारी परम्परा रही है। इसके बावजूद आज देश भीशण जलसंकट की ओर बढ़ रहा है तो यह हमारी जल कुप्रबन्धन का नतीजा है। आजादी के बाद से सरकारों व लोगों की जल प्रबन्धन  के प्रति उदासीनता रही है। भारत में सिंचाई के पानी का अकुशल इस्तेमाल, वर्शा जल के संचयन के प्रति लापरवाही, वनों का अंधाधुंध कटान, व्यापक पैमाने पर औद्योगिकीकरण, “ाहरों में अंधाधुंध कंकीटीकरण कर भू-जल संसाधनांे को अवरूद्ध करना, भू-जल का अत्यधिक दोहन आदि कारणों से जल संकट पैदा हुआ है। ऐसे में हम नदियों को जोड़कर, समुद्र के पानी को संषोधित कर, वर्शा जल का संचयन कर, जल भंडारण कर, सिंचाई के लिए वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर तथा जलसंरक्षण के प्रति जनजागरूकता पैदाकर जल संकट से निपट सकते हैं। डा. कटारिया ने बताया कि जलसंरक्षण आज पूरे विष्व की मुख्य चिंता है। प्रकृति हमें निरन्तर गति दे रही है लेकिन हम विकास की आंधी में बराबर प्रकृति का नैसर्गिक संतुलन बिगाड़ते जा रहे हैं। आज जल संकट की भयावह स्थिति को देखते हुए हमें जलसंरक्षण के प्रति समय रहते चेत जाने की जरूरत है।

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