आरक्षण को समाप्त करने की मांग: डा. संदीप कटारिया

हाल ही में जाटों और सरकार के बीच आरक्षण की बात को लेकर चार घंटे तक बातचीत होती रही। जिसमें बैठक का कोई भी नतीजा नहीं निकला। पिछले सात सालों से जाट लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक सरकार उन्हें झूठे वादे कर रही है।  पिछले साल 29 मार्च 2016 को विधानसभा ने जाटों को आरक्षण प्रदान किया था  जिसमें जाट वर्ग की नई कैटेगरी  सी जोड़कर कोटे का प्रावधान किया गया था। पहले जाट आरक्षण देकर बाद में उस पर रोक लगाने में सरकार की मिली भगत बताई गयी। अगर हर जाति आरक्षण की तरफ आकर्षित होती रही तो एक दिन ऐसा आएगा कि देश आरक्षण के बोझ तले दब कर रह जाएगा और देश में भाषा, जाति और धर्म के नाम पर अपनी राजनीतिक दुकान चलाने वाले नेता इस देश को मजदार में फंसाकर राम हवाले कर देगें। इसीलिए आरक्षण रूपी ज्वाला को जल्द समाप्त कर देना चाहिए। डा. संदीप कटारिया ने आरक्षण पर कटाक्ष करते हुआ कि संसद में महिलाओं को  33 प्रतिशत आरक्षण तो सही है। परंतु हर क्षेत्र में प्रमुख जातियां जाट, गुर्जर, मीणा आदि का आरक्षण मांगना और इसके लिए प्रदर्शन करना गलत है। आरक्षण की मांग को किसी कीमत पर किसी भी जाति या धर्म के नाम पर नहीं माननी चाहिए क्योंकि सरकार यदि एक जाति को आरक्षण देगी तो दूसरी जाति भी आरक्षण की तरफ कदम बढ़ा लेगी। इसीलिए आरक्षण के कानून को खत्म करके मानव की योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने के साधन प्रदान कराने चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का हो। आरक्षण प्राप्त जाति के विद्यार्थी यदि 33ः अंक  लेकर  आता तथा बिना आरक्षण प्राप्त जाति का विद्यार्थी 90ः अंक प्राप्त करता फिर भी 33ः अंक प्राप्त विद्यार्थी को नौकरी मिल जाती तथा 90ः अंक प्राप्त वाला व्यक्ति बेराजगार रहता है। इसके लिए यह नहीं है कि आरक्षण प्राप्त विद्यार्थी को वो नौकरी दी जाए जिसकी उसे नॉलेज ही ना हो। नौकरी देते समय ब्रेननोलिज तथा जिस क्षेत्र में उसी नौकरी दी जा रही उस क्षेत्र के लायक है या नहीं आदि की योग्यता पूर्ण करने के बाद ही  नौकरी दी जाए। हाल ही में सदन में शून्यकाल में जोधपुर से भाजपा सदस्य गजंेद्र सिंह शेखावत ने भी कहा कि जीएसटी विधेयक के समान ही केंद्र सरकार को राजनीतिक सर्वसम्मति कायम कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए एक संशोधन विधेयक लाना चाहिए। आरक्षण जाति के आधार पर ना होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए।

डा. कटारिया पिछले सात सालों से आरक्षण के मुद्दे को उठा रहे हैं। आरक्षण किसी भी जाति को ना देकर बल्कि आर्थिक रूप से  से आरक्षण की मुहिम डा. कटारिया ने पूरे भारतवर्ष में चला रखी हैं। इस मुहिम से भारतवर्ष के लाखों व्यक्ति सहमत हैं। ताकि इससे सभी व्यक्तियों को उनका समान अधिकार मिल सकें।

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