आतंकवाद विश्व के लिए एक गम्भीर समस्या है। इस समस्या का वास्तविक व अंतिम समाधान अहिंसा द्वारा ही संभव है। आतंकवाद को परिभाषित करना सरल नहीं है। क्योंकि यदि कोई पराजित देश स्वतंत्रता के लिए कदम उठाता है तो वह विजेता के लिए आतंकवाद होगा। देश के अन्दर आतंकवाद व्यवस्था के प्रति असंतोष से उपजता है। यह अति शोषण अति पोषण से पनपता है। यदि असंतोष का समाधान न किया जाए तो यह विस्फोट होकर अनेक रूपों में विनाश करता है और निरपराधियों के प्राणों से उनकी प्यास नहीें बुझती। आतंकवाद को निष्प्रभावी बनाने के लिए श्री संदीप कटारिया जी ने उनको जीवित रखने वाली परिस्थितियों को नष्ट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं।ढध्चझढचझवर्तमान में आतंकवाद हमारे देश के लिए ही नहीें बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक समस्या बन गया है। आतंकवाद से अभिप्राय अपने प्रभुत्व व शक्ति से जनता में डर फैलाकर अपना उद्देश्य सिद्ध करने की नीति ही आतंकवाद कहलाती है। हमारा भारत देश सबसे अधिक आतंकवाद की चपेट में है। पिछले 12-15 वर्षों में हजारों निर्दोंष लोग इसके शिकार हो चुके है। अब तो जनता के साथ-साथ सरकार को भी आतंक का सामना करना पड रहा है। वर्तमान शासन प्रणाली व शासकों से हिंसात्मक हथकडे अपनाकर समाप्त करना ही आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य है। भारत में आतंकवाद की शुरूआत बंगाल के उत्तरी छोर पर नक्सलवादियों ने की थी। 1967 से शुरू हुआ यह आतंकवाद तेलंगाना श्री काकूलम में नक्सलियों ने तेजी से फैलाया सी॰आर॰ए॰ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप कटारिया जी ने कहा कि आज देश में चारों ओर आतंकवाद फैला हुआ है। यदि इन्हें समाप्त किया गया तो देश की एकता, अखण्डता, स्वाधीनता खतरे में पड सकती है। आज देश के 608 जिलों में से 232 जिले आतंकवाद से तीव्र गति से ग्रासित है। आज अपने समाज की जो स्थिति है। वह किसी से छुपी नहीं है। आज आतंकवाद का चारों ओर बोलबाला है। वर्तमान में कश्माीर समस्या आतंकवाद का कारण बनी हुई है। हालांकि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही कश्मीर में घुसपैठिये हथियारों की समस्या उत्पन्न हो गयी थी। अंततः यह समस्या कारगिल के रूप में सामने आई। आज वर्तमान में भी पाकिस्तान की सीमा पार से आतंकवादी गतिविधिया जारी है। भारत सांसद पर हमला, गुजरात का अक्षरधाम मन्दिर हमला, जम्मू के रघुनाथ मन्दिर पर हमले की कार्यवाही आतंकवाद का ही हिस्सा है। आतंकवाद, कब कहा धमाका हो और कितनी जाने चली जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है। नागरिक कहीं भी अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं करता। आज देश के युवा प्रतिदिन अपराधी बनते जा रहें है। हमारा देश ही नहीें आतंकवाद से और भी कई राष्ट्र पीडित है। सन् 2001 में 11 सितम्बर को विश्व के सबसे खतरनाक आतंकवादी ओसामा बिल लादेन ने विश्व के सबसे शाक्तिशाली देश अमेरिका के वर्ल्ड टेªड सेंटर को धराशायी कर दिया। आतंकवाद को निष्प्रभावी बनाने के लिए उनको जीवित रखने वाली परिस्थितियों को नष्ट करना बहुत जरूरी है। आतंकवाद के मूल में राजनीति का अपराधीेकरण होना तो एक वजह है ही लेकिन वर्तमान में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति की भूमिका भी इसके लिए कम उत्तरदायी नहीं है कुल मिलाकर यदि इस पर जल्द ही काबू नहीं पाया गया तो यह समूचे विश्व के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि आतंकवाद पर विजय प्राप्त करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय, राजनैतिक, समाजिक आदि सभी स्तरों पर प्रयास किये जाये। संदीप कटारिया जी ने कहा कि हमारा संगठन इन समस्याओं के विरूद्व हमारे समाज की ओर प्रयास है। संदीप कटारिया जी ने कहा कि हम चाहते है कि आप भी इस जनजागरण का हिस्सा बने तथा जागृति रूप से योगदान दे।

